साहित्य

संग विदा के आगमन

मुकेश कुमार दीक्षित 'शिवांश'

अंतिम दिन है आज साल का
नया साल कलआयेगा,
जो कुछ भी हो रहा आज है
वह गत का हो जाएगा।
कैसा तुमने कर्म किया है
ज़रा सोच थोड़ा सा लो,
आगे तुमको क्या करना है
चित्त में ऐसा भी भर लो।
क्या खोया क्या पाया तुमने
चिंतन इस पर भी कर लो,
सोच समझकर आगे बढ़ना
उर की विचलन सब हर लो।
बुरा किया था बुरा हुआ है
सबक इसी से लेना है,
अच्छी-अच्छी सीख सभी को
केवल हमको देना है।
नूतन संवत लेकर आये
अब नई नई सौगातें ,
सबका जीवन मंगलमय हो
और कटें चैन की रातें।

मुकेश कुमार दीक्षित ‘शिवांश’
चंदोसी
मो०-8433013409

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