
हिंद देश के हम हैं वासी ।
हिंदी बोलें तो शाबाशी ।।
मातृ भूमि का कण कण पावन ।
धरती उगले स्वर्णिम सावन ।।
रज इसकी जब सिर पर लगती ।
देश भक्ति की आशा जगती ।।
भारत में गोधन की पूजा ।
इससे बड़ा पुण्य क्या दूजा ।।
राम कृष्ण को शीश नवाना ।
संस्कार का मिला खजाना ।।
गर्व हमें हम हिंदुस्तानी ।
धर्म कर्म की महिमा जानी ।।
सीमा पर जो खड़े सिपाही ।
भूखे प्यासे करे निबाही ।।
कुछ तो वापस घर नहीं आते ।
मातृ भूमि पर जान लुटाते ।।
सीने पर ये गोली खाते ।
दुश्मन को ये मार भगाते ।।
देश भक्ति इनकी पहचान ।
जात यही है इनकी जान ।।
नमन करूँ मैं इन वीरों को ।
मातृ भूमि के रणधीरों को ।।
नीलम अग्रवाल “रत्न” बैंगलोर
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