
तीन जनवरी जन्म हुआ महाराष्ट्र में,
एक किसान के घर गाँव नयागांव में।
नौ वर्ष की उम्र में उनका ब्याह रचाया,
पति ज्योतिराव फुले पढना लिखना सिखाया।
पुणे के भिड़े वाड़ा गाँव में पहला स्कूल खोला,
लड़कियों की शिक्षा का विचार उनके मन में आया।
शिक्षिका सावित्री स्वयं बनी समाज ने रोड़ा अटकाया।
कचड़ा फेंका और गंदगी उनके दृढ़ संकल्प को तोड़ न पाया।
विधवाओं दलित बच्चों को शिक्षा का पाठ पढ़ाया,
ज्ञान की बातें और कविता से दीप जलाया।
छुआ- छूत, सतीप्रथा के लिए लड़ाई लड़ी।
बहुत योजनाओं का संचालन कर खुद चलाया।
अठारह सौ छ्यानवे में प्लेग में बच्चों के लिए काम किया, तभी शहीद हो गई वह देश की पहली भारतीय शिक्षिका थी।
नारी सशक्तिकरण की जोत अठारह सौ अड़तालीस में जलाई,
जां बाज महिला को शत -शत नमन हमकरते हैं।
डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण
छतरपुर मध्यप्रदेश




