
पावर इतना रखो कि कोई,
गलत बोलकर तुम्हें हिला न सके,
तेरी चुप्पी में इतना वजन हो,
कि झूठा सच को छू न सके।
तुच्छ लोगों के पास न जाओ,
अपना मान वहाँ क्यों खोना,
जो खुद से हार चुके हैं,
उन्हें क्या है सच का कोना।
अगर तुम सच हो — तो शांत रहो,
तेरा सच खुद बोलेगा एक दिन,
झूठ की हर दीवार गिरेगी,
जब समय देगा अपना किन।
हर चोट से सीख लो कुछ,
हर अपमान को सीढ़ी बना दो,
जो खुद को जान लेता है,
वो दुनिया का हर डर हरा दो।
पूनम त्रिपाठी
गोरखपुर ✍️




