साहित्य

शहर -बनारस

शशि कांत श्रीवास्तव

शहर बनारस
जिसे कहते हैं -लोग ,
मोक्ष की नगरी !
आते हैं लोग यहां पर
जीवन के अंतिम समय में,
पाने को मोक्ष ,
जन्म -मृत्यु के चक्र से,
सदा के लिए |
कहते हैं मोक्ष की नगरी -उसे,
माँ –गँगा के पावन तट पर
बना घाट मणिकर्णिका का,
जहाँ,
अनवरत ,
जलती हैं -चितायें |
कहते हैं मोक्ष की नगरी -उसे,
आते हैं लेकर ,मृत -काया को
पतली संकरी गलियों से
करते हुये उद्धघोष
“राम नाम है सत्य” का ,
जो जीवन का कटु सत्य है ,
अंतिम पड़ाव जीवन का यही है
आना है और जलना है इक दिन
सभी को..|
कहते हैं मोक्ष की नगरी -उसे ||

शशि कांत श्रीवास्तव
डेराबस्सी मोहाली, पंजाब

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