साहित्य

गणपति वंदना

डाॅ. सुमन मेहरोत्रा

सब देवों में प्रथम तुम्हीं हो, सिद्धिविनायक दाता,
विघ्न विनाशक मंगलकारी, जग के पालनकर्ता।
सबके हितकारी प्रभु तुम, करुणा द्वार खोलो,
जय गणपति, जय गणपति, सब मिल जय-जय बोलो।

भादों शुक्ल चतुर्थी दिन में, प्रकटे गजमुख धारी,
एकदंत, त्रिनयन, विनायक, छवि अति मनोहारी।
थम्ब उदर, विशाल कलेवर, रूप अनूप निराला,
जय गणपति, जय गणपति, मंगलमय रखवाला।

पार्वती के राज दुलारे, शिव नयन के तारे,
तुमसे ही उत्सव में खिलते, जीवन के उजियारे।
नर-नारी सब भाव भरे, चरणों में शीश झुकाएँ,
जय गणपति, जय गणपति, भक्त तुम्हें गुण गाएँ।

मोदक प्रिय, मूषक वाहन, सौम्य सुहावन रूप,
धूप-दीप आरती सजती, हरता जग का कष्ट।
भक्त खड़े द्वारों पर तेरे, लेकर मन में आशा,
जय गणपति, जय गणपति, कर दो सबकी भाषा।

सेवा से विघ्न सभी हरते, मिलता मंगल मेवा,
हाथ जोड़ विनती करते हम, स्वीकारो यह सेवा।
कृपा करो हे गणनायक, जीवन हो उजियारा,
जय गणपति, जय गणपति, तुम ही एक सहारा।

डाॅ. सुमन मेहरोत्रा,
मुजफ्फरपुर बिहार

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