
सुकर्म की पूजा सुकर्म का है यहाँ मान
जगत में मिलता है सुकर्म को सम्मान
सुकर्म से है जीवन में सारे समाधान
आत्मसात कर सुकर्म को ओ इन्सान
सुकर्म का गीत संसार ने है जब गाया
सुकर्म ने जीवन में सुख समृद्धि है पाया
शांति सुकुन का तोहफा है दिलवाया
मनोरथ पूर्ण का फल दे कर है बसाया
कुकर्म का जीवन में करना है तिरस्कार
ककर्म दुःख संकट का है एक द्वार
कुकर्मी से नफरत करता सब संसार
मानव पाता है कुकर्म से यहाँ अपकार
सुकर्म भगवान की है अनुपम उपहार
सुकर्म सत्कर्म का सिखलाता व्यवहार
पाप से मुक्ति दिलवाता है ये हर वार
सुकर्म शांति का है अनुठा एक संसार
सुकर्म देवत्व की अनमोल है वरदान
तीनों लोक में है इनका ही गुणगान
कुकर्मी पाता है जग संसार से अपमान
सुकर्म से मन पाता है खुद आत्मसम्मान
कुकर्म असुरों का है बदचलनी का नाम
कुकर्मी का होता है यहाँ नाम बदनाम
कलंक पाकर हो जाता है यहाँ गुमनाम
मानव हो सुकर्म कर जीवंत कर ईमान
उदय किशोर साह
मो० पो० जयपुर जिला बांका बिहार
9546115088




