
वो जिन्दगी में न कुछ ताज़गी भी होती है
जो आशिकी से ही सब दुश्मनी भी होती है।।//१//
बहे है जब से अश्क़ आंख से जुदा हो के
वो दोस्ती भी न कुछ दोस्ती भी होती है।।//२//
रुठे से यार है मेरे न दिल के पास रहते
तमाम शहर में दिल से तामसी भी होती है।।//३//
ग़लत लगा हमको भी ये बात है सब कुछ
अगर कुछ न सही बेबसी भी होती है।।//४//
खुशगवार है वो अपने में यार अब मुझको
कभी जो दर्द में थोड़ी कमी भी होती है।।//५//
कनक




