
कुछ रिश्ते
जो सिर्फ और सिर्फ एहसासों से जुड़े होते हैं
अचानक ही खामोश हो जाते हैं
ना जाने क्यों और कैसे? दूसरी ओर से आवाज देने की
नाकाम कोशिशें भी व्यर्थ हो जाती हैं
और शेष रह जाती हैं
घुटन भरी साँसें और बरसती आँखे
अपेक्षा की धरती पर उपेक्षा के बीज
अनायास ही अंकुरित होने लगते हैं
खामोशी के जल से सिंचित होकर
निराशा के पुष्प पल्लवित होने लगते हैं
खण्डित हो जाती है इर्द -गिर्द
प्रेम और विश्वास की चाहर दीवारी
और कुछ बहुत ही प्यारे रिश्ते अपना वजूद खोने लगते हैं॥
विनीता चौरासिया शाहजहाँपुर उत्तर प्रदेश




