
#ये किताबें मेरी दोस्त हैं यारो,
तन्हा दिल की आवाज़ हैं यारो।
खामोशी में बातें करती,
सच की राह दिखाती हैं यारो।
हर पन्ने पर जीवन लिखा है,
हर अक्षर में सपना सजा है।
जो कह न पाऊँ लोगों से मैं,
वो किताबों ने मुझसे कहा है।
दर्द मिले जब दुनिया से मुझको,
सीने से लगाकर सहलाती हैं।
टूटे हौसलों, बिखरे मन को,
फिर से जीना ये सिखलाती हैं।
इतिहास, कविता, प्रेम की धारा,
ज्ञान का ये अनंत खजाना।
अंधेरे में दीपक बनकर,
रास्ता मेरा करती हैं उजाला।
न दौलत माँगी, न शोर किया,
बस सच्चा साथ निभाया है।
इस झूठी दुनिया में यारो,
किताबों ने सच से मिलाया है।
ये किताबें मेरी दोस्त हैं यारो,
मेरे हर कल की सोच हैं यारो।
कुलदीप सिंह रुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश




