
मुझको मुझ तक
छूने की
कोशिश कर लेना तुम ।
यदि हिम्मत है तो
आगे बढ़ लेने की
कोशिश कर लेना तुम।
न छूना कभी चांद सितारों को
नहीं छूना नील गगन को,
चुन लेना कुछ पुष्प वहां से
जो महका दे
तन मन को।
कुछ भाव भी तुम चुन लेना
कुछ शब्दों को भी लिख देना।
जो बने पथिक की राह
ऐसा पथ तुम चुन लेना।
चुन लेना तुम कुछ कंकड़ पत्थर,
भी कुछ मार्ग सुगम बनाने को।
भावों के कमल भी चुन लेना,
मन के मंदिर में चढ़ने को।
ऋतु गर्ग सिलीगुड़ी पश्चिम बंगाल
स्वरचित मौलिक रचना




