
स्वामी विवेकानंद जी की जयंती पर अर्पित हैं श्रद्धा सुमन
स्वामी विवेकानंद जी के चिंतन, राष्ट्रबोध,पर नव-रचित दोहे प्रस्तुत हैं
उठो, जागो का मंत्र दे, सोया मन जगाया,
युवा हृदय में राष्ट्र का, दीपक स्वयं जलाया।1।।
आत्मशक्ति की राह दिखी, भय का तम हर लीन,
निर्बल में भी बल भरा, विवेक-वाणी दीन।2।।
सेवा को ही धर्म कहा, कर्म बना प्रधान,
भूखे में ईश्वर दिखे, यही है सच्चा ज्ञान।3।।
न जाति बड़ी, न जन्म ही, मानव धर्म महान,
जो मानवता से दूर हो, उसकी पूजा श्मशान।4।।
वेदांत उतरा जीवन में, बनकर कर्म-विधान,
ज्ञान नहीं जो आचरे, वह है बोझ समान।5।।
शिकागो में गूँजा स्वर, भारत का अभिमान,
सहिष्णुता, समता, प्रेम –
दिया विश्व को दान।6।।
गुलामी की नींद तोड़, दी युवा को पहचान,
विवेकानंद के वचन बने, युग-युग का अभियान।7।।
धर्म वही जो जोड़ दे, टूटे मानव-भेद,
मानवता की साधना, यही है सच्चा वेद।8।।
*डॉ मंजु जौहरी मधुर*नजीबाबाद*
*जिला बिजनौर*8851760946*



