साहित्य

बहू की व्यथा

डॉ स्वाति पांडेय प्रीत

सासू मेरी बड़ी सयानी ,
छीने मेरा दाना पानी ।

देती बात बात पर ताने ,
ससुरे की भी बात न माने ।
आधी रात को जग जाए ,
शोर मचा कर हमें जगाए ।।

सबका जीना मुश्किल कर दे ,
देती सबकी नींद भगाए ।
किंवाड़ झटके, बरतन पटके,
डर से मेरी सांसे अटके ।

बात बात पर वह गुर्राएं ,
सुबह शाम मुझ पर चिल्लाए।
सारा दिन मुझ बेचारी पर,
बस बह अपनी धौंस जमाए।

उपाय मिले न कोई सोचे ,
कैसे इस आफत को रोके ।
कोई तो उपचार बताए ,
कैसे उनसे निपटा जाए ।

डॉ स्वाति पांडेय प्रीत
लखीमपुर-खीरी
उत्तर प्रदेश

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