
गये कहाँ थे बजरंगी,जो बजरंगी अब आएंगे।
अंतस के नैना खोलकर देखो, बजरंगी सर्वत्र हैं।।
भक्तों का उद्धार करें, बिगड़े काज संवारें सबके।
रामभक्त के दहिनी भुजा बन,संकट मोचक हैं कहलाते ।
विविध भाँति के नाम धरा कर हम देवों को नित्य बुलाते,
अंत: का देवत्व जगाओ,कर्म देवत्व से कर डालो,
सारे देव नज़र आएंगे,बजरंगी हर पल आएंगे।
दु:खियों में तुम मुस्कान भरो, बजरंगी तुमको मुस्काएंगें।
औरों की तुम झोली भरो, बजरंगी तेरी भर जाएंगे।
रोते को हँसाकर तो देखो, बजरंगी तुम्हें हँसाएंगे।।
सृजेता – सुषमा श्रीवास्तव,
रूद्रपुर,
ऊधम सिंह नगर, उत्तराखंड।




