साहित्य समाचार

डॉ रामशंकर चंचल की रचनाओं के ही नहीं,उनकी अद्भुत आकर्षक छवि और सादगी के भी हजारों चाहने वाले हैं

देश में साहित्य जगत में चर्चित सहज सरल छवि और सादगी लिए मानव सोच और चिंतन लिए एक ऐसे महान साहित्य साधक का नाम है डॉ रामशंकर चंचल जिनको रचनाओं के ही नहीं बल्कि 68 वर्षीय डॉ रामशंकर चंचल की अद्भुत प्रभावित करती हुई सहज सरल और सादगी लिए छवियों के चित्र भी उतने ही वंदनीय हैं और चर्चित है सालों से प्रतिदिन सैकड़ों हजारों चित्र यादगार छवि बन पाठकों के दिल और दिमाग में दस्तक दे स्थान बना चुके हैं और तो और सैकड़ो चाहने वालों ऐसे है जिन्होंने उनकी अद्भुत आकर्षक छवि को भी संग्रह कर रखा है और अक्सर मीडिया द्वारा भी उनका नयी ताजा चित्र को लेते हुए प्रकाशन किय जाता है
डॉ रामशंकर चंचल खाता है कि
हर दिन या कुछ दिन में मुझे अपनी खुद के सृजन करने के साथ सेल्फी लेना पड़ती हैं क्योंकि कि मीडिया भी उनसे नयी ताजा तस्वीर चाहता है , डॉ रामशंकर चंचल मुस्काते हुए कहते है यह भी एक कर्म करना होता हैं मुझे यह सोच कर भी कि
किसी भी तरह पाठकों को कुछ ऐसा और अच्छा लगे ऐसा दूं ताकि वो साहित्य से सरोबोर हो जुड़े रहते हुए पढ़े ताकि लुप्त हो रहा या हाशिए पर दस्तक देता साहित्य जिंदा रहे ताकि मानवीय सोच और चिंतन बराकर रहे और दुनिया में सुख सुकून बना रहे
जिस दिन साहित्य लुप्त हो गया या
साहित्य जैसी सार्थक कर्म लेखन दुनिया से नष्ट हो गया उसके प्रति आस्था और विश्वास खत्म हो गया समझे मानवीयता संवेदनशील ओर दया करुणा दुनिया से दूर बहुत दूर किसी कोने में दम तोड़ती दिखाई दें और चारों तरफ केवल स्वार्थ और अहम के सिवा कुछ नहीं दिखाई देगा
सालों से प्रतिदिन साहित्य सेवा सृजन करते हुए जी रहे डॉ रामशंकर चंचल एक बेहद संवेदना समेटे हुए मानवीय सोच और चिंतन लिए सृजन करते हुए जीवन सार्थक करते मानते हुए सदा हर हाल में खुश रहने के आदि हो चुके है और ईश्वर नसीब से जो जैसा जीवन मिला उसे स्वीकार करते हुए सतत् मानव मात्र पशु पक्षी सभी प्राणियों को वंदन करते हुए उनके प्रति दया करुणा समेटे हुए जी रहे और सृजन को अपना कर्म मानते हुए लगे हैं
आज मैं जीते डॉ रामशंकर चंचल को खुद को नहीं पता रहता है कि कल उन्होंने क्या सृजन उपलब्धि हासिल की , अक्सर उनका कहना है कि मेरा कर्म है सृजन लेखन बाकी सब ईश्वर जाने उसने इस कार्य के लिए मेरा चयन किया और मुझे यह करना है आजीवन इस से ज्यादा सोचने का वक्त नहीं मिलता है अपने जीवन में रोज़ी रोटी और अपनों का ख्याल रखने के बाद जब जैसा समय मिला ईश्वर कृपा हुए उसका आशीष मिला लिखता हूं और सत्य यह है कि मैने कभी कुछ नहीं लिखा वह लिखता है मैं लिखता हूं और भूल जाता हूं
बिना कोई धर्म राजनीति जाति आदि आदि सैकड़ों बैराग आलाप रही दुनिया से कोसों दूर रहते हुए सृजन को धर्म और कर्म मान जी रहे डॉ रामशंकर चंचल सचमुच एजे हजारों युवा पीढ़ी के लिए हितकारी प्रेरणा स्रोत बन गए हैं और ईश्वर को प्रकृति को सत सत् वंदन करते हुए जी रहे हैं शांत सौम्य और बहुत ही कम बोलने वाले डॉ रामशंकर चंचल
घर से बाहर निकल ज्यादा एकांत में अकेले में रहना और जीने में ही सुख सुकून महसूस करते हैं

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!