साहित्य

दोहा मुक्तक

डॉ गीता पांडेय अपराजिता

करें इष्ट का ध्यान नित, रखकर हृदय विशाल।
करते हैं उपकार प्रभु, भक्त मुदित हर काल।
रिद्धि सिद्धि दातार है,श्री गणपति महाराज,
बरसे कृपा अपार जब, जीवन हो खुशहाल।।

बुरा कभी सोचो नहीं, रिश्तो में हो प्यार।
धन वैभव के मोह में, तोड़ो मत परिवार।
माया जाती छूट सब, कर्म रहें बस याद,
इसीलिए करना सदा,मानव सद् व्यवहार।।

हृदय कलुषता है मिटे, ज्ञान तत्व का बोध।
प्राप्त सफलता के लिए, करते रहिए शोध।
भक्ति भाव प्रभु से करें, रखिए इतना ध्यान,
क्रियाशील हरदम रहें ,दूर सभी अवरोध।।

धर्म-कर्म की राह पर,चले जगत जो भूप।
प्रतिभा उनकी थी प्रखर,छोड़े छाप अनूप।
किए तपस्या त्याग अति, हुआ देश में नाम,
वरण करो पथ सब वही, जिसका सत्य स्वरूप।।

रिद्धि सिद्धि दातार हैं,विघ्न हरण गणराज।
एकदंत महाराज का, सुमिरण कीजै आज।
महिमा बड़ी अपार है,रखते सबका ध्यान,
करते पूरण सर्वदा,गीता का हर काज।।

लक्ष्य साधना पर सदा,रखो मनुज नित ध्यान।
धैर्य हृदय में धारकर,पथ का लें संज्ञान।
रिद्धि सिद्धि की प्राप्ति हो, पूजें प्रथम गणेश,
करते बुद्धि प्रदान हैं,करते कृपा महान।।

डॉ गीता पांडेय अपराजिता
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश

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