साहित्य

एक ख़याल

चनरेज राम अम्बुज

ख़त्म  अँधेरे  का रुआब हो जाएगा।
मेरा  चराग़  आफ़ताब  हो  जाएगा।

गर  है  नेक़  इरादा  व  हौसला  तो,
राह का पत्थर भी आब हो जाएगा।

छोड़ दो अपनी  ये  फ़िरक़ापरस्ती,
इससे  रिश्ता  ख़राब  हो   जाएगा।

मत  करो  काम   की   बातें   यहाँ,
बे-वजह सवाल ज़वाब हो जाएगा।

गर  तू   अपने   होंठ   से   छू   ले,
तो  पानी  भी  शराब  हो  जाएगा।

चनरेज राम अम्बुज

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