साहित्य

गीत

डाॅ सुमन मेहरोत्रा

माँ गौरा के दरवाजे पर आज बजी शहनाई है।
बारात सजी भोले वर संग मैना के घर आई है।।

हिमगिरि के आँगन की रौनक, दीप हजारों जलते हैं,
कलश सजे चौखट-चौखट पर, शुभ बंधन से बँधते हैं।
देवों की वाणी मृदु गूँजे, ऋषियों ने धुन गाई है,
बारात सजी भोले वर संग, मैना के घर आई है।।

नंदी की चाल निराली, शिव डमरू मधुर बजाते हैं,
गण संग नाच रहे भोले भी, सुर सब तान सुनाते हैं।
फूलों की वर्षा होती है, खुशियाँ भी अब छाई है,
बारात सजी भोले वर संग, मैना के घर आई है।।

माता मैना ने हर्षित हो, आरत थाल सजाए हैं,
गौरा के सुंदर मुख पर भी, सु-लजा रंग समाए हैं।
सृष्टि बनी साक्षी पल भर में, पावन बेला आई है,
बारात सजी भोले वर संग, मैना के घर आई है।।

सजी सभा हिमवन की पूरी, मंगल दीप जलाए हैं,
फूलों की पावन वे माला, गौरा ने हाथ उठाए हैं।
लाज भरे नयनों से देखे, मन में प्रीत समाई है,
भोले के कंठ विराजी माला, प्रेम रीत निभाई है।

वर ने भी हँसकर गौरा को, पुष्प हार पहनाया है,
सात लोक के साक्षी बनकर, पावन बंधन छाया है।
डमरू, शंख, मृदंग निनादे, सुरों की धारा आई है,
बारात सजी भोले वर संग, मैना के घर आई है।।

डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार

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