
ईख में गांठ रसहीन सूखी होती है,
वहां न रस और न मिठास होती है,
मानव जीवन कुछ ऐसा ही होता है,
जहाँ प्रेम है, वहाँ द्वेष नहीं होता है।
इंसान के रूप में जन्म का मिलना,
मनुष्य की बड़ी अच्छी क़िस्मत है,
अपनी क़िस्मत को सराहते रहिये,
यह तो देवताओं के लिये दुर्लभ है।
बिना किसी द्वेष भाव के स्वयं को
निरंतर निखारते व आगे बढ़ाते रहें,
यह जानना व समझना ज़रूरी है,
सादा जीवन, उच्च विचार जीवन है।
उपहार तो प्रभू ने सबको दिया है,
उपहार के पैक को जिसने खोला,
उसको ही अनुपम उपहार मिला है,
जिसने नहीं खोला उसे नहीं मिला है।
प्रभु भक्ति में रत रहना अच्छा है,
विनय भाव समय पर पूरा होता है,
समय का पता भी नहीं चलता है,
आदित्य मूल्य का अनुभव होता है।
विद्यावाचस्पति डॉ कर्नल
आदिशंकर मिश्र, ‘आदित्य’
लखनऊ




