
ये कटते हुए पेड़ पौधे
ये सूखती नदियां सरोवर
ये पर्वत सिमटते हुए
एक रोज़ यूं ही ख़त्म होते चले जायेंगे
क्यूं न हम सभी सहेज कर रख ले
इस प्रकृति को
आने वाले कल के लिए
और आने वाले अपनों के लिए
वृक्ष कटेंगे तो ऑक्सीजन कहां से लाएंगे
इन रोती हुई प्रकृति के आंसू
हम पोछ सकते हैं
एक समय के बाद प्रकृति के सारे आंसू सूख जाएंगे
और हमारी आंखों में आंसू होंगे
जिसे चाहकर भी हम नहीं पोंछ पाएंगे
अपनी मदद के लिए हम पुकारेंगे प्रकृति को
मौत की ख़ामोशी ओढ़े
वो बेजान सी पड़ी रहेगी
बस यूं ही देखती रहेगी
पेड़ पौधों को कटने न दें
क्योंकि यह हमारे जीवन को बचाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।।
डॉ. अनीता शाही सिंह
असिस्टेंट प्रोफेसर
प्रयागराज



