केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की मुख्य परीक्षा 2026 हेतु आलेख
17 फरवरी 2026 से प्रारंभ हो रही सीबीएसई बोर्ड की मुख्य परीक्षा देशभर के लाखों विद्यार्थियों के स्कूली जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है। शिक्षा विश्लेषक इसे केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन और परिश्रम की कसौटी भी मानते हैं जो बच्चों के शैक्षणिक भविष्य को भी तय करता है। इसलिए परीक्षा विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यालयों—सभी की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। परीक्षार्थी परीक्षा को डर नहीं, अवसर समझें क्योंकि यह वह समय है जब पूरे शैक्षणिक वर्ष की तैयारी को शांत मन से प्रस्तुत करना होता है।
समय प्रबंधन इस तरह करें कि इन दिनों में केवल सिलेबस का दोहराव करें।
परीक्षा कक्ष में प्रश्नपत्र को ध्यान से पढ़कर उत्तर लिखें जिसके लिए 15 मिनट का अतिरिक्त समय बोर्ड द्वारा आवंटित किया गया है। लेकिन इसका फायदा उन बच्चों को नहीं मिल पाता जो देर से परीक्षा केंद्र पहुंचते हैं। याद रखें—अंक आपकी क्षमता का एक हिस्सा मात्र हैं, आपकी संपूर्ण पहचान नहीं, इसलिए प्रश्नपत्र के प्रत्येक हिस्से और पूछे गए निर्धारित प्रश्न के प्रत्येक हिस्से का उत्तर देने से न चूकें। परीक्षा के दिनों में
अभिभावकों से अपेक्षा रहती है कि
इस समय बच्चों की तुलना नहीं बल्कि सहयोग करें। वे घर का वातावरण शांत और सकारात्मक रखें
बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें। संभव हो तो अपने बच्चों की छोटी-छोटी उपलब्धियों की सराहना करें। परीक्षा कक्ष में प्रवेश और निकलते वक्त आपकी एक मुस्कान और विश्वास भरे शब्द बच्चों के मनोबल को कई गुना बढ़ा सकते हैं।
शिक्षकों और विद्यालयों की जिम्मेदारी पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं होती इसलिए इस दौरान विद्यार्थियों की शंकाओं का समाधान धैर्यपूर्वक करें अतिरित
मॉडल प्रश्नपत्र और अभ्यास सत्र आयोजित कराने से बचें।
विद्यालयों को परीक्षा केंद्रों पर अनुशासन, पारदर्शिता और सहयोगात्मक वातावरण सुनिश्चित करना चाहिए। परीक्षा केंद्र परीक्षार्थियों की जरूरतों को समझें, छोटी मोटी भूल के लिए दंडित न करें, इसके बजाय उनके मूल विद्यालय और अभिभावकों से सहयोग लें।
बोर्ड परीक्षा को सफलता और अंकों तक सीमित न रखें बल्कि निरंतर सीखने की प्रवृत्ति के विषय से जोड़कर देखने की संस्कृति विकसित करें। जैसे कि परीक्षा बच्चों में धैर्य, अनुशासन और आत्मविश्लेषण का अवसर देती है। इसलिए परीक्षा को उत्सव की तरह सकारात्मक भावना से स्वीकार करें और बच्चों को अपनी क्षमता का प्रदर्शन करने का अवसर समझें।
बच्चों को मूल्यांकन प्रणाली में बदलाव को आत्मसात कराना जरूरी है जिससे वह उत्तर पुस्तिका को प्रभावी ढंग से इस्तेमाल कर सकें।
इस वर्ष से सीबीएसई की मुख्य परीक्षा में मूल्यांकन प्रणाली को अधिक पारदर्शी, दक्ष और वस्तुनिष्ठ बनाया जा रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों के लिए यह जानना आवश्यक है कि वे अपनी उत्तर पुस्तिका किस प्रकार व्यवस्थित और प्रभावी ढंग से भरें, ताकि उन्हें पूरा अंक मिल सके-
1. उत्तर पुस्तिका प्रारंभ करने से पहले रोल नंबर, विषय कोड आदि विवरण साफ और सही भरें।
2. प्रश्नपत्र को 10–15 मिनट ध्यान से पढ़ें।
3. पहले उन प्रश्नों को हल करें जिनमें आप अधिक आत्मविश्वास रखते हैं।
2. प्रस्तुतीकरण पर ध्यान दें- लिखावट साफ, स्पष्ट और पढ़ने योग्य हो।
3. प्रत्येक नए प्रश्न को नए पृष्ठ या कम से कम अलग अनुच्छेद से शुरू करें। प्रश्न संख्या सही और स्पष्ट लिखें।
4. अनावश्यक कटिंग से बचें; यदि गलती हो तो एक सीधी रेखा से काटें।
3. उत्तर की संरचना-नई प्रणाली में कॉन्सेप्ट की समझ और अनुप्रयोग को अधिक महत्व दिया जा रहा है।लघु उत्तरीय प्रश्नों में सीधे, सटीक और बिंदुवार उत्तर दें। दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों में परिचय (2–3 पंक्तियाँ), मुख्य बिंदु/व्याख्या निष्कर्ष (यदि आवश्यक हो) जहाँ संभव हो, आरेख, फ्लोचार्ट, तालिका का प्रयोग करें।
4. विज्ञान व गणित में आवश्यक चरण अवश्य लिखें—केवल अंतिम उत्तर लिखने से पूर्ण अंक नहीं मिलेंगे।
4. कॉम्पिटेंसी आधारित प्रश्नों के लिए सुझाव केस स्टडी या अनुप्रयोग आधारित प्रश्नों में प्रश्न को दोबारा पढ़कर की-वर्ड पहचानें। उत्तर में उदाहरण और तर्क स्पष्ट रखें।अपनी भाषा में लिखें, परंतु विषयवस्तु सटीक हो।
5. पूरे प्रश्नपत्र के लिए समय का विभाजन पहले से तय करें।अंतिम 10–15 मिनट पुनरीक्षण के लिए रखें।उत्तर अधूरा न छोड़ें; यदि समय कम हो तो मुख्य बिंदु अवश्य लिख दें।
6. क्या न करें-प्रश्न संख्या गलत न लिखें।अनावश्यक लंबा उत्तर न दें; जितना पूछा गया है उतना ही लिखें। उत्तर पुस्तिका में अतिरिक्त सजावट या रंगीन पेन का प्रयोग न करें।
नई मूल्यांकन प्रणाली में अंक केवल ज्ञान से नहीं, बल्कि स्पष्ट प्रस्तुति, सटीकता और अवधारणा की समझ पर ही दिए जाने हैं, जिसका स्पष्ट दिशा निर्देश बोर्ड द्वारा परीक्षकों को दिए जा चुके हैं। अतः विद्यार्थी यदि शांत मन, सुव्यवस्थित लेखन और सही रणनीति के साथ उत्तर पुस्तिका भरें, तो उत्कृष्ट परिणाम निश्चित हैं।
इस वर्ष से इंटरमीडिए स्तर पर बोर्ड द्वारा
ऑनलाइन मूल्यांकन का अभिनव प्रयोग किया जाना है जिसके अंतर्गत
वर्ष 2026 से सीबीएसई की मुख्य परीक्षा में उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन ऑनलाइन प्रणाली से किया जाना है। इसका अर्थ है कि विद्यार्थियों की आंसर शीट स्कैन होकर परीक्षक के कंप्यूटर स्क्रीन पर दिखाई देगी। ऐसे में बच्चों को विशेष सतर्कता बरतनी होगी, क्योंकि अब मूल्यांकन पूरी तरह डिजिटल स्क्रीन पर पढ़कर किया जाएगा। जब कॉपियाँ स्कैन होती हैं, तो हल्की लिखावट, हौज पौज वाला लेखन या अस्पष्ट शब्द स्क्रीन पर और भी धुंधले दिख सकते हैं। इसलिए प्रस्तुतीकरण पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। अतः विद्यार्थियों को
a) नीले पेन से स्पष्ट और गहरी गाढ़ी लिखावट में लिखना होगा। बहुत हल्का या पतला अक्षर स्कैन में स्पष्ट नहीं दिखेगा।
b) उचित मार्जिन और स्पेसिंग- प्रत्येक प्रश्न के बीच पर्याप्त स्थान छोड़ें।
c) बिंदुवार उत्तर लिखें ताकि परीक्षक को स्क्रीन पर उत्तर पढ़ना आसान हो।
d) प्रश्न संख्या स्पष्ट लिखें, गलत या अस्पष्ट प्रश्न संख्या से मूल्यांकन में दिक्कत होगी। प्रत्येक उत्तर से पहले प्रश्न संख्या बॉक्स या अलग पंक्ति में लिखें।
e) आरेख और ग्राफ जो पेंसिल से बनाए गए हों स्पष्ट और गहरे हों। लेबल साफ लिखें; बहुत छोटे अक्षरों से बचें। ग्राफ में स्केल सही दर्शाएँ।
f) अनावश्यक कटिंग से बचें। बार-बार काटने या ओवरराइटिंग से स्कैन की गुणवत्ता प्रभावित होती है। यदि गलती हो तो एक सीधी रेखा से काटें।
g) पन्ना न मोड़ें और न फाड़ें। मुड़े हुए या क्षतिग्रस्त पृष्ठ स्कैन में ठीक से नहीं आते।उत्तर पुस्तिका को साफ-सुथरा रखें।
h) शिक्षकों से अपेक्षा की जाती है कि
बच्चों को प्रैक्टिस टेस्ट में साफ और सुव्यवस्थित लिखने का अभ्यास कराएँ।
डिजिटल मूल्यांकन की प्रक्रिया समझाकर उनका आत्मविश्वास बढ़ाएँ।
ऑनलाइन मूल्यांकन प्रणाली पारदर्शिता और निष्पक्षता को बढ़ावा देती है, परंतु इसमें प्रस्तुतीकरण की भूमिका और अधिक बढ़ जाती है। यदि विद्यार्थी साफ, सुसंगठित और स्पष्ट लेखन शैली अपनाएँ, तो डिजिटल स्क्रीन पर भी उनका उत्तर उतना ही प्रभावी दिखाई देगा जितना कागज़ पर।
निर्मल न्योलिया, विज्ञान शिक्षक, राजीव गांधी नवोदय विद्यालय, खटीमा, ऊधम सिंह नगर।



