आलेख

आंग्ल वर्ष 2025 को विदाई, 2026 का स्वागत

डॉ. शिवेश्वर दत्त पाण्डेय 

समय का चक्र निरंतर गतिमान है। एक और आंग्ल वर्ष—2025—अपनी स्मृतियों, अनुभवों और उपलब्धियों के साथ इतिहास के पृष्ठों में दर्ज होने जा रहा है। उसके स्थान पर 2026 नई आशाओं, नए संकल्पों और नए सपनों के साथ हमारे सामने उपस्थित है। यह परिवर्तन केवल तारीखों का नहीं, बल्कि चिंतन और चेतना का भी है।
वर्ष 2025 समाज, संस्कृति और साहित्य—तीनों ही दृष्टियों से आत्ममंथन का वर्ष रहा। इस दौरान दुनिया ने अनेक चुनौतियाँ देखीं, पर साथ ही मानवीय जिजीविषा और रचनात्मक ऊर्जा की सशक्त अभिव्यक्ति भी हुई। साहित्य ने इस वर्ष भी अपनी भूमिका निभाई—कभी संवेदना की आवाज बनकर, कभी सामाजिक विसंगतियों पर प्रहार करते हुए और कभी आशा का दीप जलाकर अंधकार से संघर्ष करते हुए।
समाचार पत्रों, पत्रिकाओं और डिजिटल मंचों पर रचनाकारों ने समकालीन यथार्थ को शब्द दिए। कविता, कथा, आलेख और विचार—सबने मिलकर समाज को सोचने पर विवश किया। यह वर्ष हमें यह भी सिखाकर जा रहा है कि साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज की चेतना को दिशा देने वाला दायित्वपूर्ण माध्यम है।
अब 2026 का स्वागत एक नए उत्साह और नई जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए। यह वर्ष हमसे अपेक्षा करता है कि हम अपनी लेखनी को और अधिक सत्यनिष्ठ, जनोन्मुखी और संवेदनशील बनाएं। साहित्यकारों का दायित्व है कि वे समय की नब्ज पहचानें और आम जन की पीड़ा, संघर्ष तथा आकांक्षाओं को स्वर दें।
नववर्ष का आगमन हमें यह अवसर देता है कि हम बीते वर्ष की कमियों से सीख लें और आने वाले समय को अधिक मानवीय, अधिक संस्कारित और अधिक समरस बनाने में योगदान दें। यदि शब्दों में ईमानदारी और भावों में करुणा होगी, तो साहित्य निश्चित ही समाज को नई दिशा देगा।
आइए, आंग्ल वर्ष 2025 को कृतज्ञता के साथ विदा करें और 2026 का स्वागत इस विश्वास के साथ करें कि यह वर्ष साहित्य, संस्कृति और समाज के लिए सकारात्मक परिवर्तन का संदेशवाहक बनेगा।
नववर्ष 2026 सभी पाठकों और रचनाकारों के जीवन में शांति, सृजन और सद्भाव लेकर आए यही कामना।

(लेखक दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह के संस्थापक और समूह सम्पादक हैं)

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