आलेख

प्रेरक कहानी है रुड़की क्षेत्र के अंतर्गत गांव रांघडवाला के प्रदीप कुमार की

एक छोटे से गांव से निकलकर बड़ी उपलब्धि हासिल करने वाले युवाओं की कहानियां अक्सर समाज को नई दिशा देती हैं। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी है रुड़की क्षेत्र के अंतर्गत गांव रांघडवाला के प्रदीप कुमार की, जिन्होंने तमाम चुनौतियों के बीच यूजीसी नेट दिसंबर 2025 परीक्षा उत्तीर्ण कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र और जिले का नाम रोशन किया है।

रांघडवाला गांव के एक साधारण किसान परिवार में जन्मे प्रदीप कुमार, पुत्र प्रीतम सिंह, बचपन से ही पढ़ाई के प्रति गंभीर और लक्ष्य के प्रति सजग रहे। सीमित संसाधनों और ग्रामीण परिवेश के बावजूद उनके भीतर आगे बढ़ने का जुनून कभी कम नहीं हुआ। परिवार की आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियां आसान नहीं थीं, लेकिन माता-पिता ने शिक्षा के महत्व को समझते हुए हर संभव सहयोग दिया। यही संस्कार आगे चलकर प्रदीप की सबसे बड़ी ताकत बने।

प्रदीप कुमार वर्तमान में तकनीकी शिक्षा विभाग में राजकीय पॉलिटैक्निक हरिद्वार के प्रशासनिक अनुभाग में कार्यरत हैं। सरकारी जिम्मेदारियों के बीच समय निकालना अपने आप में चुनौतीपूर्ण होता है, फिर भी उन्होंने अपने शैक्षणिक लक्ष्य से समझौता नहीं किया। वर्ष 2024 से वे शासकीय कार्यों के साथ-साथ पीएचडी भी कर रहे हैं। नौकरी, शोध कार्य और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी — इन तीनों को संतुलित करना आसान नहीं था, लेकिन उनकी अनुशासित दिनचर्या और स्पष्ट लक्ष्य ने उन्हें निरंतर आगे बढ़ाया।

इस सफलता की सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि प्रदीप कुमार 80 प्रतिशत दिव्यांग हैं। शारीरिक चुनौतियां अक्सर लोगों के हौसले को कमजोर कर देती हैं, लेकिन प्रदीप ने इन्हें अपनी पहचान नहीं बनने दिया। उन्होंने साबित किया कि सीमाएं शरीर में हो सकती हैं, संकल्प में नहीं। कठिन परिस्थितियों में भी उनका आत्मविश्वास और सकारात्मक दृष्टिकोण उन्हें लगातार प्रेरित करता रहा। यूजीसी नेट जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति के सामने बाधाएं छोटी पड़ जाती हैं।

गांव और आसपास के क्षेत्र में प्रदीप की इस उपलब्धि को गर्व के साथ देखा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रदीप बचपन से ही मेहनती और शांत स्वभाव के रहे हैं। वे अक्सर युवाओं को पढ़ाई के लिए प्रेरित करते थे और स्वयं भी निरंतर सीखने में विश्वास रखते हैं। उनकी सफलता ने गांव के बच्चों और युवाओं में नई ऊर्जा भर दी है। अब कई छात्र उन्हें अपना आदर्श मानकर उच्च शिक्षा की ओर कदम बढ़ाने की बात कर रहे हैं।

प्रदीप कुमार का मानना है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। नियमित अध्ययन, समय प्रबंधन और आत्मविश्वास ही किसी भी लक्ष्य तक पहुंचने के मूल मंत्र हैं। वे अपनी उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और सहयोगियों को देते हैं, जिन्होंने हर मोड़ पर उनका मनोबल बढ़ाया। उनका कहना है कि दिव्यांगता को कमजोरी नहीं, बल्कि अलग तरह की ताकत के रूप में स्वीकार करना चाहिए।

आज प्रदीप कुमार की सफलता केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। उन्होंने यह संदेश दिया है कि परिस्थितियां चाहे कैसी भी हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास ईमानदार हों, तो मंजिल अवश्य मिलती है। रांघडवाला गांव का यह होनहार युवा आने वाली पीढ़ियों के लिए उम्मीद, साहस और संघर्ष का जीवंत उदाहरण बन चुका है।

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