
फागुन की मधुमास हवा में, छाई नव उजियारी,
रंग भरी एकादशी आई, लेकर छवि प्यारी।
गुलाल उड़े गलियों-आँगन, महके हर द्वार,
भक्ति और अनुराग मिले, झूमे नर-नार।
ढोलक की थापों पर गाए, मंगल गान सुहाने,
राधे-श्याम रंग में डूबे, सबके मन दीवाने।
अंबर से बरसे जैसे, सतरंगी आशीष,
मन के सारे द्वेष मिटे, जागे प्रेम अधीश।
कुंज-कुंज में हास-विलास, छेड़े मुरली तान,
रसिक हृदय में फूट पड़े, मधुरिम प्रेम विधान।
पीत वसन पर लाल अबीर, शोभा अपरम्पार,
हर मुख पर मुस्कान सजी, मिटे हृदय का भार।
संतों की वाणी में घुला, नाम-स्मरण रसधार,
भक्ति-सुधा से भीग उठा, जग का कण-कण सार।
रंगोत्सव यह दे संदेश, रहे सदा सद्भाव,
रंग भरी इस एकादशी में, प्रेम बने उत्सव भाव।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार




