साहित्य

सफ़र

सुमन बिष्ट

इस ज़िन्दगी के सफ़र में जो भी मिला,

मैंने उसे अपनाया लिया
फूलों ने मुस्काना सिखाया, तो
काँटों ने हौसला बढ़ाया दिया

रास्तों ने ठोकर दी तो संभलना है कैसे,

मैंने खुद को समझा लिया
हर गिरने के बाद फिर उठकर
चलना, जीवन ने सिखा दिया

प्रेम ने दिल को नरमी दी,
अहंकार को मैंने भुला दिया
नफ़रत के शोर में भी मैंने
प्यार का दीप जलाया दिया

किसी की आँख में आँसू देख,
उसमें अपना सा दर्द पा लिया
थोड़ी सी आत्मीयता से रिश्तों को
मैंने टूटने से बचा दिया

जो मिला सहज भाव से,
मैंने उसे सर माथे लगा लिया
जो छू न सका मन को, उसे
चुपचाप नज़र अंदाज कर दिया

दुनिया ने बहुत कुछ छीना, पर
मैंने सभी पर प्रेम लुटा दिया
खुशी बाँटने में ही है जीवन का
अर्थ, ये सबको समझा दिया

ना वैर चुना, ना द्वेष रखा,
मन को शांत संतुष्ट बना लिया
और हर साँस के साथ एक नये
विश्वास का बीज उगा दिया

इस नश्वर से जीवन में मैंने
यही सत्य कमाया लिया
प्रेम और खुशी से बढ़कर कुछ
नहीं,दुनिया को यही लौटा दिया

सुमन बिष्ट, नोएडा

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