साहित्य

भारत का कर्तव्य

डॉ.उदयराज मिश्र

भारत को अब चाहिए,घुसकर करे प्रहार।
कठमुल्लों को दंड दे,अब भारत सरकार।।

दीपू को जिसतरह से,मारे मिल हैवान।
भारत का कर्तव्य है,बढ़ छीने पहचान।।

इकहत्तर विस्मृत किये,ये यहसानफरोश।
रोम रोम में कोप है,जन जन में आक्रोश।।

भीख मांगता घूमता,यूनुस तुच्छ लबार।
लेकिन हिन्दू जो वहाँ,वे बेबस लाचार।।

बात बतंगड़ हो चुकी,अब भय से ही प्रीति।
चुनचुन पापी मारिये,यही सनातन रीति।।

बड़बोलों की बोल से,खौल रहा है खून।
नोबेल ने क्या देखकर,समझा अफलातून।।

महापतित अतिभ्रष्ट है,अब बांग्ला सरकार।
दीपू के संग जो हुआ,उसका हो प्रतिकार।।

– डॉ.उदयराज मिश्र

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