
आया है शिवरात्रि का, अनुपम दिवस महान।
शिव पार्वती विवाह में, सखियाँ करती गान।
लाल वसन शोभित उमा, वर माला है हाथ।
चञ्चल दृग है खोजती, कहाँ छिपे हो नाथ।
आना जल्दी पास तुम, रखना मेरा मान।
शिव पार्वती विवाह में , सखियाँ करती गान।।
शंभु संग पहुँचे सभी, हीम वान के द्वार।
भूत प्रेत नर्तन करे, फुफकारे महि हार।
हीम वान चिंतित हुए, कैसे हो सम्मान।
शिव पार्वती विवाह में, सखियाँ करती गान।।
मैना दौड़ी फिर चली , भागी नारद पास।
नारद आप बताइए , क्या है इनमें खास।
*माथ पीट रोने लगी*, कर दें आज निदान।
शिव पार्वती विवाह में, सखियाँ करती गान।।
नारद बोले मृदु वचन, त्यागें अब कुविचार ।
शिव शंकर सा है नहीं, दूजा इस संसार।
जल्दी जल्दी अब चलें, होगा व्याह विधान ।
शिव पार्वती विवाह में, सखियाँ करती गान।।
मंद मंद लेकर हँसी , पहुँचे गौरी पास।
वरमाला डालो प्रिये, पूरी कर लो आस।
सुमन वृष्टि होने लगी, बजता ढ़ोलक तान।
शिव पार्वती विवाह में, सखियाँ करती गान।।
रचना मिश्रा “रूही”




