साहित्य

शूल बनेंगे फूल

डॉ गीता पाण्डेय अपराजिता

सर्व धरा ज्योतिर्मय होगी, दृश्यमान संगीत।
आशाओं के दीप जलाकर, लिख देंगे हम जीत।।

लक्ष्य साधकर आगे बढ़ना, साध्य लगेगी हाथ।
पथ में कंटक बहुत मिलेंगे, साहस रखना साथ।।
सुख-दुख तो जीवन का क्रम है,यही जगत की रीत।
आशाओं के—————-

कर्मों का फल सबको मिलता,भले लगेगी देर।
सोच-समझकर कदम बढ़ाना,करना मत अंधेर।।
रिश्तों में मत कटुता लाना,रखना भाव पुनीत।
आशाओं के ——————-

संघर्षों के आदी बनकर, करते रहें प्रयास।
होता नहीं निरर्थक श्रम है, ऐसा हो विश्वास।।
सुखमय जीवन जीना है तो, इसे बना लो मीत।
आशाओं के —————–

चढ़ते जाएंँ सोपान सदा ही, बाधाएँ हों चूर।
झुका रहे हरदम सिर अपना, जब भी हों मशहूर।।
धूप छांँव वर्षा सब सहना, कभी न हों भयभीत।
आशाओं के—————

उदित सूर्य सम जग में चमके, करें तिमिर का नाश।
दृढ़ संकल्पित भाव हृदय भर,छूँ लें हम आकाश।
बात करें हम आगम की ही,भूलें सभी अतीत।
आशाओं के—————-

मात-पिता गुरु की बातों को, समझे हम अनुकूल।
उनके आशीषों से पथ के, शूल बनेंगे फूल।।
झूठ कपट छल दंभ त्याग कर, प्रभु से रखना प्रीत।
आशाओं के—————

डॉ गीता पाण्डेय अपराजिता
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश

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