
वीर सपूत साहस भरकर, जब रण में संग्राम किए।
स्वाभिमान रख धर्म बचाया, जीवन भर आगे ही रहे।।
वीर शिवाजी की तलवार उठी, औरंगजेब में हाहाकार मची।
शिवाजी महाराज की धर्म के खातिर, मुगलों को ललकार थी।।
मातृभूमि की रक्षा खातिर, संकल्प अटल जो लिया था।
वीर शिवाजी ने जग में पराक्रम अपना दिखा दिया था।।
दुर्गों की जब शान बढ़ाकर, जय जय गान हुआ।
रणभेरी के स्वर में कही न उनमें अभिमान हुआ।।
छल- बल की कोई नीति नहीं थी, नीति रही अभियान की।
जन – जन के मन में बसता था, स्वराज्य स्वाभिमान का।।
मातु जीजा बाई के संस्कार का रहे प्रभाव।
न्याय करुणा वीरता का रहे स्वभाव।।
इतिहास के स्वर्णिम पन्नों पर अमिट रहेगा उनका नाम।
वीरता त्याग का देते हैं वह पैगाम।।
सनातन संस्कृति के महानायक भगवा ध्वज वाहक थे।
सर्वधर्म सम्मान में के वो एक अधिनायक थे।।
भारत में वीरता का होगा उनका गुणगान।
छत्रपति शिवाजी का रहेगा सदा सम्मान।।
डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण
छतरपुर मध्यप्रदेश




