साहित्य

यह देश कहां ले जाओगे

योग्यता को दंड बनाकर,
हुनर को आप मिटाओगे ।
मेधा को अपमानित करके
यह देश कहां ले जाओगे।।

चयन में न्याय नहीं होगा,
भविष्य कैसे बचाओगे।
नींव खोखली होगी जब-जब
मजबूती कैसे पाओगे।।
यह देश…..

प्रतिभा पड़ी चुपचाप रोएगी,
तो ज्ञान कहां से लाओगे।
शिक्षा को राजनीति बनाकर,
शिक्षा नीति मिटाओगे।।
यह देश……

मेहनत रोए मेहनत करके,
इंसाफ नहीं कर पाओगे।
सच बंदे का गला घोट कर,
तुम नेता बन जाओगे।।
यह देश……..

संविधान में उंगली करके,
भेदभाव अपनाओगे।
जन-जन के इस प्रश्न का उत्तर,
कभी नहीं दे पाओगे।।
यह देश कहां से लाओगे।

मेधा को अपमानित करके,
यह देश कहां ले जाओगे।
मेघा को अपमानित करके
यह देश कहां ले जाओगे।।

दिनेश पाल सिंह ‘दिव्य’
जनपद संभल उत्तर प्रदेश

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!