
एक कहावत वास्तव में सही मानी जाती है, आपातकालीन *विपरीत बुद्धि*, इसी को प्रमाणित करती हुई घटना जो आज दिल्ली और आसपास के क्षेत्र में चर्चित है की सिलेंडर की बहुत कमी आ गई है युद्ध के चलते हुए।
तो आम आदमी इस बात को सुनकर बहुत परेशान और हैरान भी है कि जो सिलेंडर हमारे एक हजार के अंतर्गत आ जाते थे ,आज वह तीन-तीन हजार में दो-दो हजार में ब्लैक में बेचें जा रहे हैं और अगर कहीं ,तो बुकिंग वाले यह भी कह रहे हैं कि अभी बुकिंग नहीं हो रही है ,अगर हैं तो ४५ दीन में या २५ दिन में नंबर आयेगा।
यहां पर आता है सवाल कि जैसे ही कोई आपदा की स्थिति देश आती है तो यह ब्लैक माफिया वाले उसमें अवसर तलाशना शुरू कर देते हैं जैसा उन्होंने करोना काल में किया था की ऑक्सीजन सिलेंडर ब्लैक में आने लगे थे।
कमी , तब भी आक्सीजन सिलेंडर की नहीं थी, बनाईं गई थी जिसके फलस्वरूप कितने घर उजड़ गए थे।
वहीं गैस सिलेंडर को लेकर, लोग वापिस गांव जाने तक की सोच रहें हैं।
सवाल इस बात का है कि क्या *मानवता हमारे देश से बिल्कुल खत्म हो गई है* हां मुझे लगता है कि वास्तव में खत्म हो गई है ।
जैसे ही हमारे देश पर आपदा आती है तो तुरंत कुकर्मी लोग उसे आपदा को अवसर में परिवर्तित कर देते हैं उन्हें मौका मिल जाता है काला धन कमाने का,
और क्या ज्यादा कहना की एक बहुत पुराना गाना था *होठों पर सच्चाई रहती है जहां दिल में सफाई रहती है हम उस देश के वासी हैं जिस देश में गंगा बहती है*।
वरना देवस्थली कहां जाने वाला हमारा भारत ऐसे कहां जाएगा।
*होठों पर सच्चाई रहती थी, जहां दिल में सफाई रहती थी,हम उस देश के वासी हैं जिस देश में गंगा बहती थी।*
*जागो मानव, जगाओ मानवता*
*सीमा शर्मा “मंजरी,”*
*अरनावली/मेरठ*
७९८२५३२८८८




