साहित्य

बादळ बादळी रा दूहा

राकेश कुमार पंवार

बादळ बादळी रा दूहा

बादळ कै सुण बादळी, मरूधर भासा हीण |
ताळो जड़्यो जबान रै ,मिनख बजावै बीण ||

कळपण लागी बादळी ,मायड़ पूत कपूत |
लाज शर्म नी दूध री,सो बर जाओ ऊत ||

कळपै मत ना बादळी , छोड मरू प्रदेश |
जठै नी मायड़ मानता, बठै पड़ै नी पेश ||

सुण बादळ कै बादळी , छुटै नी मरूधर हेत |
मरूधर भासा दूबळी ,बरस्यां निपजै खेत ||

सेबा घल्या गलाफ मैं, बगै खून रा खाळ |
मायड़ तड़फै बादळी ,मरसी बिना सम्हाळ ||

सुण बादळ कै बादळी,बरस्यां मिलै जे मान |
दूरळ मचा करवांवती, मिनखां धोळा ध्यान ||

भासा लू़ठी मरूधरा , बिना मान मनुवार |
राजस्थानी लोगड़ा , है धरणी पर भार ||

बादळ थारी बातड़ी , एक रती नी कूड़ |
भासा री बिना मानता, मिनखां धोळां धूड़ ||

कोकळ जल्मी बेगिणी ,मायड़ झेल्यो भार |
ताना दे रैई बादळी | डूब मरो मनझधार ||

बादळ कै सुण बादळी, छोड परायो दूख |
चाल ओसरां धोरियां, बरस्यां मिलसी सुख ||
लेखक:-
राकेश कुमार पंवार

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button
error: Content is protected !!