साहित्य

गणतंत्र दिवस

डॉ गीता पांडेय अपराजिता

गणतंत्र दिवस प्यारा आया, जिससे बढ़ी देश की आन।
संविधान लागू कर इस दिन, सकल विश्व में इसका मान।।

वीर भूमि की शान बढ़ाते, खुद का देकर के बलिदान।
फिक्र नहीं रहती अपनी है, गजब बनी इनकी पहचान।।
सौम्य सुशोभित ये लगते हैं, रखते कर्तव्यों का ज्ञान।
ज्ञान ज्योति से दीपित रहते, इनसे बनी हिंद की शान।।

साहस का जज्बा है भरते, जय हिंद बोलते निर्बाध।
वंदेमातरम गीत गाते, इंकलाब नारे को साध।।
रखें देश की ये मर्यादा, मर मिटने को है तैयार।
पावन रज को भाल लगाते, माता पर जाँ करें निसार।।

अद्भुत वीर जवान हमारे, बैरी को देते हैं मात।
सीमा पर करते सेनानी,वतन सुरक्षा दिन अरु रात।।
बर्फीली चोटी ऊँची हो, या हो तपता रेगिस्तान।
टक्कर दुश्मन को हैं देते,रखें देश का हरदम मान।।

आन तिरंगा शान तिरंगा, रखें बाँकुरे मन में भाव।
कटा शीश रण में ये देते, लाल सदा रखते हैं चाव।।
सरहद पर खड़े जवानों का, सब जन करना नित सम्मान।
करें भारती का जयकारा, उठी गूँज है हिंदुस्तान।।

डॉ गीता पांडेय अपराजिता
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश

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