
मुन्नी कहती रानू से आज बड़ी ही धूप है
गर्मी का मौसम आया गर्म हवा चली है।
आम के बगीचे मे कोयल की आवाज नहीं
उसे कहाँ ढूंढ़ू उसकी आवाज सुने चैन नहीं।
रानू कहती आम के पेड नहीं ठंडी हवा नहीं
कोयल कहाँ रहेगी पानी भी पीने का नहीं
गौरैया भी आती थी आंगन में जब मेरे
अब उसकी भी चीं चीं चीं की आवाज नहीं।
मुन्नी बोली रानू चलो एक एक पेड़ लागायें
पानी से सींच बड़ा करेंगे कोयल गौरैया आयेंगी
पेड़ रहेगा पानी बरसे ठंडी हवा फिर चले
आंगन में अपने मुन्नी खुशियाँ फिर से छायेंगी।
डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण
छतरपुर मध्यप्रदेश




