साहित्य

बचपन का मौसम

सुखमिला अग्रवाल'भूमिजा'

फिर न लौटेगा कभी मौसम सुहाना यह।
फिर न झूमेगा सरल बचपन दिवाना यह।।

याद आयेंगे मधुर दिन वो सुहाने से।
रात-दिन शैतानिया‌ँ करना बहाने से।
अब कहां वो झगड़ना भोला जमाना यह।

फिर न लौटेगा कभी मौसम सुहाना यह…

काम कोई था नहीं बस मस्तियां करना।
वो मचलना रूठ कर मनमर्जिया‌ँ करना।
जिद्दियों का जो हटीला सुगबुगाना यह।

फिर न लौटेगा कभी मौसम सुहाना यह…

सुखमिला अग्रवाल’भूमिजा’
©® स्वरचित मौलिक
मुंबई

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