साहित्य समाचार
डॉ रामशंकर चंचल की एक ही लिंक खोल देखी जाने कविता 3 हजारों द्वारा सराही गई

झाबुआ मध्य प्रदेश आदिवासी पिछड़े अंचल में जन्मे डॉ रामशंकर चंचल की अद्भुत लोकप्रियता इस बात से पता चलता है कि लिंक खोल कर पड़े जाने पर उसे सार्थक उपलब्धि माना जाता है जिसे मात्र कुछ दिन में 3 हजारों द्वारा सराही गई , रोना चाहता हूं पर वक्त नहीं मिलता, दिल को छू जाती यह कविता मन और आत्मा से निकल कर आई अद्भुत कविता है जो सदियों जिंदा रहेगी और प्रेरणा स्रोत बन कर जीवन में सार्थक कर्म पथ पर चलते हुए प्रेरित करेगी
धन्य धरा झाबुआ आदिवासी पिछड़े अंचल जहां जन्म हुआ डॉ रामशंकर चंचल आज सम्पूर्ण देश और विश्व में चर्चित हो चर्चा बन गए है जो साहित्य जगत में किसी परिचय के मोहताज नहीं है




