साहित्य

फुस्स हो गया गैस सिलेंडर

सतीश चन्द्र श्रीवास्तव

फुस्स हो गया गैस सिलेंडर
फक्क हो गया चूल्हा।
मुरझा कमल,बची डंडी ले
झूम रहा है दूल्हा।

ईंधन का अकाल,मुंहझौंसी
भूंख न जाने बाधा।
जै हो,जै हो के नारों से
ख़र्च न होगा आधा।

देख तेल,फिर धार तेल की
मुड़ जाएगा कूल्हा।
फुस्स हो गया गैस सिलेंडर
फक्क हो गया चूल्हा।

वादों की,सपनों की खिचड़ी
खा कर बहुत अघाए।
धरम-करम की गरम रोटियां
सेंकी,भूख न जाए।

हम सब सूखी गुठली,साहब
काजू गोल मटूल्हा।
फुस्स हो गया गैस सिलेंडर
फक्क हो गया चूल्हा।।

सतीश चन्द्र श्रीवास्तव
रामपुर मथुरा जिला सीतापुर

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