फुस्स हो गया गैस सिलेंडर
फक्क हो गया चूल्हा।
मुरझा कमल,बची डंडी ले
झूम रहा है दूल्हा।
ईंधन का अकाल,मुंहझौंसी
भूंख न जाने बाधा।
जै हो,जै हो के नारों से
ख़र्च न होगा आधा।
देख तेल,फिर धार तेल की
मुड़ जाएगा कूल्हा।
फुस्स हो गया गैस सिलेंडर
फक्क हो गया चूल्हा।
वादों की,सपनों की खिचड़ी
खा कर बहुत अघाए।
धरम-करम की गरम रोटियां
सेंकी,भूख न जाए।
हम सब सूखी गुठली,साहब
काजू गोल मटूल्हा।
फुस्स हो गया गैस सिलेंडर
फक्क हो गया चूल्हा।।
सतीश चन्द्र श्रीवास्तव
रामपुर मथुरा जिला सीतापुर



