
अपनी मुहब्बत अपनी वफ़ा के बारे में
क्या-क्या बताऊँ अपनी ख़ता के बारे में।।
जो बशर बिक गए हैं चंद रूपयों की खातिर
वो बात कर रहे हैं अना के बारे में।।
मां-बाप को जो रोटी न दे सके देखो
पढ़ते कसीदा हैं वो ख़ुदा के बारे में।।
है खून का जो रिश्ता औ साथ बीता बचपन
कैसे बताऊँ उनकी दगा के बारे में।।
खामोश रहके बातें सुनी मैंने सबकी
मुझको बता रहे हैं वो हया के बारे में।।
मुझको नज़र लगी है पर अब तलक हूँ जिंदा
मत पूछिएगा मुझसे दुआ के बारे में।।
‘ऋतु’ लफ्ज़ हाल-ए- दिल की बयानी नहीं मेरे
मैं बात कर रही हूं बस खिजां के बारे में।।
सद्यरचित
डॉ ऋतु अग्रवाल
मेरठ, उत्तर प्रदेश



