साहित्य

बाल कविता जल बचाओ

आशा जाकड़

बूँद- बूंँद वसुधा गिरती
धरती को सिंचित करती
हरा- भरा खुशहाल करे
अन्न-फसल पैदा करती।।

बूंँद -बूंँद है जल की धार
पृथ्वी का अनुपम श्रंगार
वन -उपवन महक उठते
ईश्वर का सुन्दर उपहार।।

बूँद – बूँद हमको बचाना
व्यर्थ न एक बूंँद बहाना
बूंँद- बूंँद से भरती गागर
बूंँद -बूंँद भर देता सागर।।

जल हमारा अति कीमती
पानी से ही साँसें मिलती
बिन पानी जीवन है व्यर्थ
पानी से खुशियाँ मिलती।

जल है बहुत ही अनमोल
जल है तो हमारा है कल
जल ही हमारा है जीवन
जल से धरती हो शीतल।।

आशा जाकड़

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