
राम की भक्ति में मन लगाने लगी।
मैं भजन राम के गुनगुनाने लगी।।
राम हनुमान संग जपती ही रही।
मन बसी पीर को मैं मिटाने लगी।।
नाम लेकर तुझी का सबेरे उठे।
भक्ति की ज्योति जल जगमगाने लगी ।
जब कभी संकट सता रहे थे मुझे।
राम की शक्ति हिम्मत बढ़ाने लगी।।
राम नाम मन को खिलखिलाने लगा ,
जिंदगी भी “सुमन” मुस्कराने लगी।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार




