साहित्य

गर्मी की दस्तक

सुरेन्द्र कुमार बिन्दल कलमकार

सर्दी की ऋतु गई ।
गर्मी की ॠतु आई।
जीव जंतु पक्षी हुए बेहाल हुऐ।
गर्मी ने आकर पसीना छुटाया।
सूरज की आभा तेज धरती पर गिरी।
तेज धूप से सबका शरीर जलाऐ।
भीषण गर्मी से प्यासे ।
पशु पक्षी इधर-उधर भटक रहे हैं।
दिनों दिन गर्मी बढ़ती जाए।
भीषण गर्मी का यह धमाल।
सुख रहे हैं नदी, तालाब, पोखर।
पशु पक्षियों के लिए रखना पानी।
पानी पीकर पशु, पक्षी, मनुष्य हो खुशहाल।
सुरेन्द्र कुमार बिन्दल कलमकार जयपुर राजस्थान।

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