साहित्य

ज्ञान देना यहाँ सब कोई चाहता है

डा० कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’

चरित्र की महिमा शांत स्थिर होती है
आचरण जैसे भी हों अनुसरण होते हैं
ज्ञान व पैसा बहती धारा के किनारे हैं
एक दूसरे से बिलकुल अलग होते हैं।

ज्ञान देना यहाँ सब कोई चाहता है,
पर ज्ञान लेना कोई नही चाहता है,
वैसे ही पैसा देना कोई नहीं चाहता है,
पर जैसे भी हो लेना हर कोई चाहता है।

विश्वास दीपक की तरह अँधेरे में
रोशनी की किरण जैसा होता है,
यकायक कुछ भले न दिखा सके
पर धीरे धीरे आस्था में बदलता है।

शब्दों का महत्व उनके कहे जाने
के भाव से ही पता चल जाता है,
स्वागत तो पायदान में भी लिखा
होता है, जो बिछा पैरों तले होता है ।

स्वयं के कर्मों की महत्ता उनकी
अच्छाई बुराई पर ही निर्भर होती है,
पर कर्मों का भय ज़रूर होता है,
इसीलिये गंगा स्नान में भीड़ होती है।

क़र्म ही धर्म है यह समझना
हमें जीवन में ज़रूरी होता है,
क्योंकि पाप इस शरीर से कम
विचारों से अधिक से होता है ।

गंगा स्नान से शरीर धोया जाता है
क़र्म और विचार तो मन से धुलते हैं,
आदित्य मृत शरीर भी धोया जाता है,
क़र्म, धर्म, विचार सब यहीं रह जाते हैं।

डा० कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
लखनऊ

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