
आजादी का दिन है आया,
लहू ने इतिहास जगाया,
माँ भारती की बेड़ियाँ टूटीं,
वीरों ने प्रण निभाया।
फाँसी, गोली, जेल की यातनाएँ,
हँस-हँस वीरों ने अपनाया,
तिरंगे की शान बचाने को
जीवन तक बलिदान चढ़ाया।
लाल किले से गूँजा नारा,
स्वाभिमान आसमान तक छाया,
हर छाती में ज्वाला धधकी,
हर मन ने शस्त्र उठाया।
खेती, सीमा, श्रम की धरती,
वीर सपूतों ने सजाया,
आज न झुकेगा भारत माता,
ये संकल्प सबने दोहराया।
आजादी का दिन है आया,
शौर्य का पर्व मनाया,
जब तक सूरज-चाँद रहेंगे,
भारत अमर कहलाया।
कुलदीप सिंह रुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश




