
ये रंगमहल ये सड़क गलियां ये चौबारे
सब धरा के हैं संपदा धरा नहीं तुम्हारे
खाली हाथ आया है खाली हाथ जायेगा
जैसा कर्म किया है फल वैसा ही पायेगा
ये धन दौलत ये हीरे जेवरात सब प्यारे
चन्द पल का साथ है ये सब तुम्हारे
खाली हाथ आया है खाली हाथ् जा येगा
जैसा कर्म किया है फल वैसा ही पायेगा
ये अर्धांगनी ये बेटे बेटी रिश्तेदारी सारे
थोड़े दिनों की रिश्ते निभायेंगें तुम्हारे
खाली हाथ आया है खाली हाथ जायेगा
जैसा कर्म किया है फल वैसा ही प्रायेगा
ये माया मोह की धरती में घूम रहा है प्यारे
कहने को तो सब अपना है जग में तुम्हारे
खाली हाथ आया है खाली हाथ जायेगा
जैसा कर्म किया है फल वैसा ही पायेगा
ये बेईमानी से उपजे खून खराबा सारे
अर्जन किया है अपराध है सब तुम्हारे
खाली हाथ आया है खाली हाथ जायेगा
जैसा कर्म किया है फल वैसा ही पायेगा
उदय किशोर साह
मो० पो० जयपुर जिला बांका बिहार




