
तप से मिलता ज्ञान है,बालक समझो मोल।
विद्या गुरु से ही मिले,माता बोले बोल।।
प्रथम कर्म है शिष्य का,कठिन परिश्रम जान।
विद्या ही है साधना,इससे मिलता मान।।
बालक का उद्देश्य हो,पाना गुरु से ज्ञान।
गुरुकुल शिक्षा प्राप्त कर,बनता शिष्य महान।।
ध्यान लक्ष्य पर साधकर,करो ज्ञान की खोज ।
बालक को करना पड़े,कठिन परिश्रम रोज।
स्वाद जीभ का छोड़कर,करो ज्ञान रस पान।
गुरु के ही संज्ञान से,मिले सफलता जान।।
नीलम अग्रवाल “रत्न” बैंगलोर
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