साहित्य

कहती है कुछ कर कविता

डा. नरेश कुमार 'सागर'

कहती है कुछ कर कविता —-

जीवन की रसधार कविता
यादों की बौछार कविता
भूखे की रोटी जैसी है
सावन की मल्हार कविता
जीवन के रसदार कविता ……….
इंद्रधनुष के रंगों जैसी
सागर की लहरों के जैसी
तनहाई में लिक्खी जाती
शब्दों का संसार कविता
जीवन की रसधार कविता………
मोर के प्यारे पंखों जैसी
कोयलिया के गीतों जैसी
उम्मीदों के राजमहल में
कभी-कभी बेजार कविता
जीवन की रसदार कविता……
आंसू की निर्मलता में है
अधरो की मादकता में है
गोरी के घूंघट में बैठी
जीवन का श्रृंगार कविता
जीवन की रसधार कविता …….
गूंगों की आवाज कविता
अंधों का उजियार कविता
लंगडो की यह लाठी बनती
जन-जन का आधार कविता
जीवन की रसधार कविता………
योद्धाओं के काव्य -खंड में
जयशंकर के गद्य -पद में
मातृभूमि के जयचंदों पर
बनकर टूटी तलवार कविता
जीवन की रसधार कविता ………
राम की पावन सीता जैसी
मीरा के मनमोहन जैसी
सतयुग और कलयुग दोनों में
लिखती रही अवतार कविता
जीवन की रसधार कविता……..
मां की छाया के मधुबन में
प्रीतम के प्रिय आलिंगन में
कुदरत लिखती जो धरती पर
हरा -भरा नित प्यार कविता
जीवन की रसधार कविता…….
दुःखों में सुख जैसा अनुभव
विपदाओं में शक्ति – वैभव
परिवेशों में ढलने वाली
करती है चमत्कार कविता
जीवन की रसधार कविता ……..
विरह की वेदनाओं में
मिलन की संभावनाओं में
जलते हुए दीपक के नीचे
कहती है कुछ कर कविता
जीवन की रसधार कविता………
यादों की बौछार कविता
भूखी की रोटी जैसी है
सावन की मल्हार कविता।।
………..
मूल रचनाकार-
जनकवि/ बेख़ौफ़ शायर –
डा. नरेश कुमार ‘सागर’
गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज
9897907490

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