

1* जीवन बड़ा अनुराग भरा,
मिल गया रिश्ता,
तुम्हारे लिए।
2* ज़िन्दगी चल पड़ी आगे,
दो पहियों पर,
तुम्हारे लिए।
3* कल की फ़िक्र नहीं,
सिर्फ आज है,
तुम्हारे लिए।
4* आज में बिता दिया,
जीवन का लम्हा,
तुम्हारे लिए।
5* एक भरोसा, एक विश्वास,
रहा हरदम साथ,
तुम्हारे लिए।
6* परिश्रम से न घबराए,
चाहा और पाया,
तुम्हारे लिए।
7* हर रुकावट फांद गए,
कभी न हारे,
तुम्हारे लिए।
8* देखते देखते निकल गए,
खट्टे मीठे गलियारे,
तुम्हारे लिए।
9* सृजन-दुनिया बसी,
अब मैं बची,
तुम्हारे लिए।
10* चलो ख़्वाब सजाते हैं,
मधुर गीत गुनगुनाएं,
तुम्हारे लिए।
11*नींद भरी अँखियों में,
स्वप्न सजीले हुए,
तुम्हारे लिए।
12* भोर हुई चिड़ियाँ चहकीं,
उपवन कलियाँ खिलीं,
तुम्हारे लिए।
13* पूर्वांचल में सूर्य उगा,
अम्बर लालिमा छाई,
तुम्हारे लिए।
14* नयन उन्मीलित हो गये,
मलय पवन आई,
तुम्हारे लिए।
15* तैयार होकर कार्यालय चले,
संध्या बुलाती है,
तुम्हारे लिए।
16* बच्चों ने शोर मचाया,
पापा आ गए,
तुम्हारे लिए।
17* प्रेम पूरित नयन मिले,
आत्मा तृप्त हुई,
तुम्हारे लिए।
18* सबने मिल भोजन किया,
समस्या सबकी सुनी,
तुम्हारे लिए।
19* चाँद आया चाँदनी छिटकी,
कुमुदिनी खिल गई,
तुम्हारे लिए।
20* कुछ गुफ्तगू होती रही,
अलसाई अँखियाँ मुंदीं,
तुम्हारे लिए।
सुषमा श्रीवास्तव, मौलिक सृजन,©®, रूद्रपुर, ऊधम सिंह नगर,उत्तराखंड।



