साहित्य

क्यूं बन बैठा जग में शैतान

उदय किशोर साह

पाप की ये महल  पाप कर्म से जो बनाई
रह लो चन्द दिन खुशी से  बन कर जमाई
तेरी कर्मों की होगी एक दिन  गिन हिसाब
कलियुग है कलि का है अपना ही मिजाज

घमंड गुरूर की नशा हर एक पे आजमाया
दीन दुःखी व जन जन को है तुने    रुलाया
गरीबों की छीन ली है सुख बन कर शैतान
हक व निवाला लूटा था बन कर    बेईमान

पड़ोसी को सताया हँस हँस कर उन्हें रूलाया
जीवन भर तुमने  पाप की संपति है   कमाया
तेरे कर्म की होगी तुमको ही सब।    भुगतान
पूजा पाठ जप तप ना आयेगा तेरा कोई काम

जो बीज है बोया उस बीज का पौधा उग आया
बुराई उपजाया बुरा फल तेरे झोली में   समाया
अच्छाई भलाई से सदैव दूर था तेरा  वो शाम
सूद समेत अब मिलेगा उन सब का   अंजाम

रात अंधेरी हो या  दिन का चकाचौंध उजियारा
तेरे खाते में अंकित हो रहा गणित तेरा     सारा
जग में हो रहा तेरा नाम आज भी       बदनाम
परिजन भी ना आयेगा अब तेरा कोई भी काम

उदय किशोर साह
मो० पो० जयपुर जिला बांका बिहार
9546115088

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