साहित्य

माँ दुर्गा स्तुति

डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’

मैया शैलसुता ब्रह्मचारिणी माँ,
चंद्रघंटा देवी कुशमांडा माता,
स्कन्दमाता कात्यायिनी माता,
कालरात्रि, महागौरी सिद्धिदात्री
माता का आवाहन करिये करिये।

युग पाणि जुड़े हैं विनती में,
हे मातु दया करिये करिये,
अभिमान मिटे तन का मेरे,
तन कष्ट मेरा हरिये हरिये।

लक्ष्मी, दुर्गा तुम सरस्वती,माँ,
तुम हो महिसासुर मर्दिनि माँ,
धरती के सब पाप हरिए हरिये,
माँ, भक्तों पे कृपा करिये करिये।

मैया तुम तो शेरा वाली हो,
काली तुम खप्पर वाली हो,
माँ दुर्गा क्षमा शिवाधात्री हो,
माँ जग के संकट हरिये हरिये।

मैया तेरे दर पे सब भक्त खड़े,
पहाड़ों वाला सरूप धरिये धरिये,
अगर कपूर से ज्योति जलाकर,
आरती पूजा स्वीकृत करिये करिये।

जय मैया ओ शेरा वाली माँ,
मेरी मातु पहाड़ों वाली माँ,
तेरे दरशन को हम तरस रहे माँ,
दर्शन देके उपकृत करिए करिये।

ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमलारानी,
आगम निगम बखानी शिव पटरानी,
आदित्य पुकार रहा सुनिये सुनिये,
मैया हम सब के पाप हरिये हरिये।

डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
लखनऊ

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