
शायद हैं, तुम्हें वो उमंग
जो उड़ान भरने दे तुम्हें।
ना कभी रोके पर,
आगे बढ़ने का मौका दे तुम्हें।
हंसते – हंसते आगे ,
जाने का मौक दे तुम्हें।
शायद हैं, तुम्हें वो उमंग
जो उड़ान भरने दे तुम्हें।
– रिया राणावत
कालीदेवी, झाबुआ (मध्य प्रदेश)

शायद हैं, तुम्हें वो उमंग
जो उड़ान भरने दे तुम्हें।
ना कभी रोके पर,
आगे बढ़ने का मौका दे तुम्हें।
हंसते – हंसते आगे ,
जाने का मौक दे तुम्हें।
शायद हैं, तुम्हें वो उमंग
जो उड़ान भरने दे तुम्हें।
– रिया राणावत
कालीदेवी, झाबुआ (मध्य प्रदेश)